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शिशॠकी तà¥â€à¤µà¤šà¤¾ बहà¥à¤¤ सेंसिटिव होती है इसलिठजनà¥â€à¤® के बाद कà¥à¤› शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ सालों में केमिकल यà¥à¤•à¥â€à¤¤ चीजों का इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कम ही करना चाहिà¤à¥¤ हालांकि, कà¥à¤› घरेलू चीजों से आप बचà¥â€à¤šà¥‡ की सà¥à¤•िन को हेलà¥â€à¤¦à¥€ और साफ रख सकती हैं।
शिशॠकी सà¥à¤•िन बहà¥à¤¤ नाजà¥à¤• और मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® होती है। गरà¥à¤ से बाहर आने के बाद बाहर के वातावरण में à¤à¤¡à¤œà¤¸à¥â€à¤Ÿ होने में शिशॠको समय लगता है। उसकी बहà¥à¤¤ जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पतली सà¥à¤•िन अà¤à¥€ विकसित ही हो रही होती है। इस समय में बचà¥â€à¤šà¥‡ की सà¥à¤•िन टोन में बदलाव दिखना सामानà¥â€à¤¯ बात है।
​बेसन का पेसà¥â€à¤Ÿ
कचà¥â€à¤šà¥‡ दूध में हलà¥â€à¤¦à¥€ या बेसन मिलाकर शिशॠके शरीर पर लगाà¤à¤‚ और 5 से 10 मिनट के बाद इसे साफ और सूती कपड़े से हटा दें। दूध में विटामिन à¤, डी, बी12, लैकà¥à¤Ÿà¤¿à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ और बायोटिन के साथ कई अनà¥â€à¤¯ पोषक ततà¥â€à¤µ à¤à¥€ मौजूद होते हैं।
यâ€à¤¹ नैचà¥à¤°à¤² कà¥â€à¤²à¥€à¤‚जर की तरह काम करता है जिससे सà¥à¤•िन हाइडà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ रहती है। हलà¥â€à¤¦à¥€ में à¤à¤‚टी-बैकà¥â€à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² और à¤à¤‚टी-इंफà¥à¤²à¤¾à¤®à¥‡à¤Ÿà¥à¤°à¥€ गà¥à¤£ होते हैं जो रंगत को निखारने का काम करते हैं। इस पेसà¥â€à¤Ÿ से शिशॠकी सà¥â€à¤•िन में चमक आà¤à¤—ी और उसकी रंगत निखरेगी।
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